YESTERDAY WAS MY DAY…………कल यानी 2 अक्टूबर को मैं ने अपना जन्म दिन भागलपुर से निकली “सध्भावना यात्रा “में सम्मिलित होकर गुज़ारा !

भागलपुर से लगभग 7 km की दूरी पर बसा “बैजानी” गाँव इतिहास के पन्नो में अपनी जगह बना चूका है I मनोज मीता जी और उनके सहयोगी पिछले 3 साल से विराट “गाँधी उत्सव” आयोजित कर रहे हैं I अब यह काफी मशहूर हो चूका है I इसका प्रमाण है येहाँ देश के कई भागों से विद्वानों का इस समारोह में सम्मिलित होना I

मेरा सौभाग्य है कि आयोजकों ने मुझे तीनो साल सम्मिलित होने का अवसर दिया I पिछले साल श्रीमती सुजाता चौधरी जी ने मंच से सुभानपुर गाँव में अपनी 10 बीघा ज़मीन गाँधी आश्रम बनाने के लिए दान में देने कि घोषणा की थी I

इस साल वहां पर इसका शिल्नायास का विधिवद कार्यक्रम  “गाँधी उत्सव” के आयोजकों दुआरा संपन्न हुआ I

कल बैजानी गाँव में बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण और एक संगोष्टी के समापन के बाद Cars, Motorcycles का विशाल समूह भागलपुर के बैजानी गाँव से 30 km दूर बसे बांका जिला के सुभानपुर गाँव “सद्भावना यात्रा “ के रूप में रवाना हुआ I सुभानपुर और उसके आस पास के गाँव में बिलकुल मेला जैसा दृश्य था I लोगों का उत्साह देखने योग्य था I  औपचारिक शिलान्यास के बाद बाक़ी दुसरे कार्यक्रम बहुत ही सफलता पूर्वक सम्पन्न हुए I

 

Situated at a distance of 7 Km from Bhagalpur, village Baijani has carved its place in the history. Manoj Meeta jee & his supporters have been very successfully organizing “Gandhi Utsav” for the past three years. It has now become very famous. Its popularity & recognition is proved by the participation of scholars from various parts of the country.

I am lucky to have participated in all the three celebrations.

Last year Dr.(Mrs)Sujata Chaudhry , a hard core Gandhian & a scholar par excellence, was generous enough to donate 10 bighas of land in village Subhanpur in the neighboring Banka district for the construction of “Bapu Ashram”.

A formal foundation laying ceremony was organized at the site of the proposed Ashram yesterday.

Back to Baijani, after a brief seminar & paying floral tribute to Bapu, a big fleet of cars & motorcycles , started a 30 Km long Baijani- Subhanpur “Sadbhavna Yatra” from Baijani at around 4PM. The scene in Subhaanpur & adjoing villages was no less than that of a mela. The excitement & the festivity was worth seeing.

After laying the foundation stone, other programs were conducted very successfully.

 

 

 


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