KABHI KABHI AISA BHI HOTA HAI…… ….बेजुबान गायों के साथ शूट की सच्ची कहानी !
(FB पर आज ही के दिन, दो साल पहले अपने पोस्ट को हिंदी अनुवाद के साथ, नए दोस्तों के लिए दुबारा पेश कर रह हूँ )
परदे पर केवल चरित्र ही नहीं नकली होते हैं, बल्कि जगह भी अक्सर नकली होती है I विज्ञानं की प्रगिती का लाभ फिल्म के कैमरा मैन और एडिटर्स पूरी तरह उठाते हैं और कहीं का सीन कहीं का बनाकर दिखाते हैं I
हम लोग टीवी सीरियल “लौट आये बापू” में छतीसगढ़ के नक्सल प्रभावित छेत्र दिखलाना चाहते थे , पर वहाँ जाने के बजाये हम लोगों ने पूरा एपिसोड हरयाना में सूरजकुंड- गुर्गाओं रोड स्थित एक गाँव में शूट किया , जो चारो तरफ से पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ था I
January का महिना था और ठण्ड अपने पूरे शबाब पर थी I शहरों से दूर खुली जगहों पर, ठण्ड का प्रकोप और भी भीषण होता है I उस पर से हमें कुछ सीन रात के समय शूट करना था I यूनिट के सारे लोग दो दो sweater, जैकेट, टोपी इत्यादी पहने हुए थे और फिर भी काँप रहे थे I मैं चूँकि बापू का रोले कर रहा था, इस लिए में सिर्फ एक धोती और चादर में शूट कर रहा था I शूट में ब्रेक के दौरान , यूनिट वाले मेरे ऊपर एक शाल डाल देते थे , जो कि इस ठंडक में नाकाफी था I
मेरे साथी एक्टर अनुपम श्याम ओझा (सज्जन सिंह) शूट के दौरान बीमार पड़ गए और बीच रात में डॉक्टर को लोकेशन पर बुलाना पड़ा I उनकी तबियत संभली , तब हम लोगों ने शॉट पूरा किया I
गाँव वालों के लिए भी तीन दिन त्यौहार जैसा गुज़रा और उनलोगों ने हमें घर का खाना खिलाकर आदर दिया I
शूट के आखरी दिन, मुझे एक एक्टर के साथ गाँव की गली में , काफी लम्बा डायलाग बोलते हुए चलना था I कैमरा साथ साथ ट्राली पर चल रहा था I फाइनल टेक में, अचानक से, लग भाग दो दर्जन गायों का एक झुण्ड , एक गली से निकल कर हमारी तरफ आ गया और साथ साथ चलने लगा I
गरचे मैं काफी डर गया था क्योंकि उनकी सिंघें चारो ओरे से हमें touch कर रही थी , फिर भी हिम्मत जुटा कर शॉट जारी रखा I जब हम शॉट पूरा करते हुए कैमरा फील्ड से बाहर आये, तो पूरे यूनिट वालों ने तालियों से स्वागत किया , चूँकि शॉट बहुत ही natural हुआ था I
निर्देशक नाजिम नकवी साहेब ने रिटेक मना कर दिया चूँकि गएँ रिटेक के लिए तैयार नहीं थी I वो कह रही थी ‘ हम इंसानों की तरह नकली नहीं होते हैं” I
KABHI KABHI AISA BHI HOTA HAI…… story of cows, taking part in film shoot !!
If the characters shown on the screen are not actual, the location too, is not real. With the advancement of technologies, the Cinematographers & the Editors, are in a position to create any location, anywhere.
We were to shoot an episode of TV serial “Laut Aye Bapu” and the script was based on Naxal movement of Chattisgarh. Instead of going all the way to Chattisgarh jungles, a matching location was located near a village on Surajkund-Gurgaon Road in Haryana. The village was surrounded by small hillocks & jungles, ideal to be shown as the ravines of Chattisgarh.
It was the month of January, with winter at its peak. Winter is all the more severe in open areas, away from the inhabitation. As if this was not enough to make our life difficult, the shoot required night shots too. Entire crew & all the actors used double sweaters, jackets, monkey cap etc. It was me alone, who had to be contended with a dhoti & a Chadar, as I was playing Bapu’s character. I couldn’t afford to use jacket, even during the break, fearing distortion of the costume. At best, I could cover my body with a woolen shawl, during the breaks.
My co-actor Anupam Shyam Ojha , aka Sajjan Singh, fell ill on the location and a doctor had to be called. Thankfully, he recovered shortly and we resumed the shoot.
It was a three day festival for the villagers too. They were very hospitable and provided home cooked food for us.
On the last day of the shoot, there was a shot, where I was to walk in the village lanes, along with another actor. I had to deliver long dialogues, while walking in the narrow lanes. The camera was moving alongside. In the final take, suddenly a herd of over two dozen cows suddenly came out from a side lane, on to the lane, where we were walking. They surrounded me & the other actor from all side and stared moving with us.
Although, I was quite frightened to see their horns, almost touching me from all sides, I didn’t lose nerve, continued walking & delivering the dialogue .Once, we reached the end of the lane, ever body clapped, as the shot with the cows around, was very natural, although unplanned.
The director Mr.Nazim Naqvi, announced that there shall not be a retake of the shot, as the cows didn’t agree for a retake, saying,
“WE ARE NOT FAKE, LIKE YOU HUMAN BEINGS” 
This beautiful shot was a part of the edited, episode also.

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