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“FROM “MELA STORES”……TO…. “MEGA STORES”

FROM “MELA STORES”……TO…. “MEGA STORES” !!!!!
(आज ही के दिन 3 साल पहले वाले अपने FB के पोस्ट का हिंदी अनुवाद पेश कर रहा हूँ , उमीद है पसंद आयेगा )
भागलपुर शहर का 50 साल का सफ़र ……
आज से 50 साल पहले भागलपुर में वैरायटी चौक के निकट “MELA STORES” नाम का एकलौता Departmental स्टोर हुआ करता था , जिसे सानन नाम का एक सिन्धी परिवार चलाता था I तब भागलपुर में येही एक दूकान थी जहाँ प्रसाधन सामग्री या मन पसंद टूथ पेस्ट इत्यादी मिलते थे I अब तो मोहल्ले के हर नुक्कड़ पर दुकानें खुल गयी हैं जहां इस तरह की हर चीज़ें उपलब्ध हैं I
50 साल पहले Car की संखिया इतनी कम थी कि उँगलियों पर गिनी जा सकती थीं I इन में आधी से भी ज़यादा सरकारी होती थीं I मेरे घर में हरे रंग की BRA 66 नंबर की बड़ी सी Ford V-8 Car हुआ करती थी I Car के नंबर से लगता है कि यह बिहार की 66th गाडी थी जो कि पटना में Registered हुई थी I आज हर गली में इतनी गाड़ियां हैं कि traffic की समस्या बन गयी हैं !
50 साल पहले उँगलियों पर गिनने लायक घर थे जहां telephone हुआ करते थे I आज लग भाग हर पॉकेट में फ़ोन मिलेगा !
50 साल पहले घर में Fridge होना हैस्यत का सूचक था I आज हर दुसरे घर में फ्रिज मिलेगा I TV, Washing Machine, Microwave इत्यादी का तो जन्म भी नहीं हुआ था !
.50 साल पहले शहर की जन संख्या 1 Lac से भी कम थी इ, जब कि आज शायद 10 Lacs से भी ज़यादा लोग रहते हैं !!
50 साल पहले शहर के सभी लोग एक दुसरे को जानते थे , प्यार करते थे , अपना दुःख दर्द बांटे थे I
आज भागलपुर में वोह सब कुछ है जो एक बड़े शहर में होता है I बड़े बड़े Mega Stores, Malls, Flashy cars, Hotels, Fast Food joints इत्यादी है , पर नहीं है तो वोह पुरानी तहजीब, पुरानी परम्परा , पुरानी संस्कृति …..
आज हमारे पास सब कुछ है पर कुछ भी नहीं है ….
1960 की सुपर हिट हिंदी फिल्म “बम्बई का बाबु “ के मशहूर गीत का अंतरा याद आता है , जिसके बोल कुछ इस तरह हैं :
‘GALIYAN HAIN APNE DESH KI, JAISE HON AJNABI………किसको कहे कोई अपना यहाँ !!!a b c d e f g h i j l


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“WOH KHUSHI MILI HAI MUJHKO , MAIN KHUSHI SE MAR NA JAUN”

FB COVER PHOTO copyWOH KHUSHI MILI HAI MUJHKO , MAIN KHUSHI SE MAR NA JAUN………चूँकि जिस College मैं 50 साल पहले एक Student की हैसियत से आया था , वहां Chief Guest की हैसियत से गया !!


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“TERA HO RANG KOI, TERA HO ROOP KOI”

TERA HO RANG KOI, TERA HO ROOP KOI……….कुछ फर्क नहीं नाम तेरा “PRABHU ” हो ,या “GOWDA” !!

झूठा है तेरा वादा , वादा तेरा वादा !!

(Aaj hi ke din 2017 ke apne post ko dobara pesh kar raha hun).

2017 में Railway Budget आया ही नहीं , क्योंकि इस साल उसे General Budget में ही शामिल कर लिया गया था I

इस पोस्ट पर लिखी ये हानी, पिछले साल यानी 2016 के Railway Budget की है I पढ़िए और सर धुनिए ………..

मैं उस शराबी की तरह हूँ, जिस ने मैखाना नहीं जाने की क़सम खा राखी हो, फिर भी चला जाता हो I मैं ने पहले ही से सोंच रखा था कि मैं इस साल Railway Budget देखूगा ही नहीं I पर ग़लती से रिमोट पर उंगलियाँ चली गयीं I रेल मंत्री सुरेश प्रभु Budget पेश कर रहे थे I मुझ से रहा नहीं गया और मैं ने पूरा भाषण सुना I जैसे ही उनहोंने मुंबई-अहमदाबाद route पर “Bullet Train” की घोषणा की , ट्रेन से सम्बंधित ,मुझे 35 साल पहली घटी , एक घटना की याद आ गयी I

मैं बता दूं की मुझे दुनिया की दो मशहूर Superfast ट्रेन पर यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है I यह ट्रेन है , जापान की “Bullet Train” और फ्रांस की “TGV Train” I

आज से 35 साल पहले ,अपने साथ घटी,जापान में ट्रेन से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का विवरण , अपने FB दोस्तों के लिए नीचे पेश कर रहा हूँ……..

बात साल 1980 की है ! मैं जापान के Tokyo शहर में ठहरा हुआ था ! एक दिन मैं ने देखा कि सारे टीवी चैनल, सारे समचार पात्र पर ,विशिष्ट रूप से एक समाचार छपा था , जो मुझे समझ में नहीं आया ! मैं ने देखा , होटल में भी सभी लोग उसी समाचार पर विचार-विमर्श कर रहे थे ! मैं ने पुछा कि कोई बड़ा संकट आया है क्या ! जब उन्होंने ने बताया तो मेरी साँसे अटक गईं , चूँकि मुझे हर दिन ट्रेन की यात्रा करके अपने काम के लिए जाना था और एक दिन का बर्बाद होना, बहुत महंगा पड़ता ! उन्होंने बताया कि जापान इतिहास में पहली बार “JNR (Japanese National Railway” के यूनियन ने एक दिन के हड़ताल का नोटिस दिया है ! इसके लिए ,वोह लोग समाचार पत्रों में, नागरिकों से छमा भी मांग रहे हैं !

अब सुनये, हड़ताल में क्या करने वाले थे ! हड़ताल में , यूनियन ने सारी ट्रेन की स्पीड एक दिन के लिए 10 % घटाने का फैसला किया था ! यानी जो ट्रेन किसी जगह से किसी जगह 60 मिनट में जाती है, वोह 66 मिनट में जाएगी ! यह था उनकी समय की पाबंदी और देश के लिए निष्ठां !

अपने येहाँ , ट्रेन 6-8 घंटा देर से चलती है, तो लोग उसे नार्मल समझ कर आसानी से ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार करते हैं !

अब वापस रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी के बजट के पास चलते हैं I राजनीतिक मजबूरी के कारण , हर साल की तरह इस साल भी बजट , लुभाने वाले वादों से भरा था I किसी भी रेल मंत्री , चाहे UPA का हो या NDA का, इन वादों का एक अंश भी नहीं पूरा कर सके I इन्ही कारण से , मैं ने भी बजट नहीं देखना का इरादा किया था I

जहां तक रेलवे की दैनिये स्थिति का सवाल है, इसके लिए रेल मंत्रालय के साथ साथ , रेल कर्मचारी और आम जनता भी ज़िम्मेदार है I

क्या कर्मचारी, JNR (Japan National Railways) के कर्मचारी के तरह देश भक्त हैं ? और फिर ,यह कहाँ तक सही कि रेलवे संपत्ति के रख रखाव की ज़िम्मेदारी केवल रेल विभाग की है I क्या साफ़ सफाई के लिए आम जनता ज़िम्मेदार नहीं हैं ?

जब तक आम जनता और रेल कर्मचारी , रेल को सुधारने में नहीं भाग लेंगे , रेल की स्थिती में सुधर हो नहीं सकता है , चाहे रेल मंत्री “सुरेश प्रभु “ हों या “सदानंद गौडा “ I

एक आम आदमी तो येही कहेगा :

MAIN INTEZAAR KARUN, YEH DIL NISAR KARUN, PAR KAISE AITEBAAR KARUN………………….झूठा है तेरा वादा , वादा तेरा वादा !!!!

 

FB INDIAN TRAIN 1 copy FB INDIAN TRAIN 2 copy FB INDIAN TRAIN 3 copy


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” SURAJKUND MELA NAHI DEKHA TOH KYA DEKHA”

SURAJKUND MELA NAHI DEKHA TOH KYA DEKHA……..अगर आप दिल्ली में हैं तो Handicrafts के इस विश्व स्तरीय मेले में जाना न भूलें !

इस साल यह मेला 18 February 2018 तक चलेगा I
व्यस्ता के कारण मैं इस साल नहीं जा सका I FB दोस्तों के लिए मैं अपने पिछले visit का ब्यौरा और कुछ तस्वीरें पोस्ट कर रहा हूँ …..

SAARE JAHAAN SE ACHCHA, HINDUSTAAN HAMAARA…………..हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुल्स्तान हमारा !!!

मैं अपने एक करीबी दोस्त Mr.Prince के आग्रह पर जीवन में पहली बार सूरजकुंड मेला देखने गया I मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि दो दशकों से अधिक समय से दिल्ली में रहने के बावजूद , मैं ने इस अधभुत पर्व को इतने दिन कैसे miss कर गया I

आईए , अब इस मेले की कुछ मूल जानकारी दे दें I

यह दो सप्ताह चलने वाला वार्षिक समारोह हरयाना सरकार दुवारा हर साल February महीने में आयोजित किया जाता है , जिस में भारत के सभी प्रान्तों के अलावा विश्व के दर्जनों देशों से शिल्पकार अपनी हस्त कला का प्रदर्शन करते हैं , जिसको देखने लाखो लोग आते हैं I

रंग रंगीले stalls के बीच जगह जगह पर Food Court होते हैं जहाँ देश के सभी हिस्सों के स्वादिष्ट व्यंजन आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र होते हैं I

इतना ही नहीं आगंतुकों के मनोरंजन के लिए ,विश्व के विभिन्य हिस्सों से आये हुए लोक कलाकार open air theater में लगातार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए नज़र आएंगे I

मुझे केवल एक ही परेशानी का सामना करना पड़ा और वोह था इस विशाल मेले को पैदल चलकर घूमना I गरचे , जो लोग इतना चलने में असम्हार्थ हैं, उनके लिए हेलीकाप्टर से मेला देखने का भी इंतज़ाम रहता है I

इस विराट मेले में हर तरफ मर्द, औरतें और बच्चे , हर मुमकिन रंग के रंग बिरंगे पोशाक पहने हुए मिलते हैं जिन्हें देख कर , मन कहता है कि सच मुच भारत “अनेकता में एकता “ का एक ज्वलंत उदहारण है I

और जब आप मेला मैदान से निकलते है तो खुद बखुद गुगुनाने लगते हैं :

SAARE JAHAAN SE ACHCHA, HINDUSTAAN HAMAARA…………..हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुल्स्तान हमारा !!!

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“RISHTE KHOON KE NAHIN”

RISHTE KHOON KE NAHIN………….एहसास के होते हैं !

सुनील दूवेदी से मेरा कुछ इसी तरह का रिश्ता है I सुनील से मेरी पहली मुलाक़ात आज से 10 साल पहले वेस्ट बंगाल के एक मिल की Restructuring के दौरान हुई I

वो मौलिक रूप से इलाहाबाद का रहने वाला एक अत्यंत सुसंस्कृत, शिक्षित और दूर दर्शी इंसान है I मुझे पहली ही मुलाक़ात में लग गया कि यह लम्बी दौड़ का घोडा है I मेरा अनुमान सही निकला I आठ साल में उसने अफ्रीका में अपना बहुत बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य खडा कर लिया है I आज उसकी गिनती वहाँ के सफल उद्यमियों में होती है I

सुनील से मेरा रिश्ता बाप बेटे जैसा है और इसी की लाज रखने आज वो दिल्ली आया तो मेरे चरण स्पर्श करने और मुझ से आशीर्वाद लेने मेरे घर आया I

MAY ALLAH BLESS YOU MY SON SUNIL… AAMEEN !

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“MY NEW FB PROFILE PICTURE”

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“UJRE HUE CHAMAN KE DILDAR BAHUT HAIN”

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UJRE HUE CHAMAN KE DILDAR BAHUT HAIN………मेरा नसीब है कि खरीदार बहुत हैं !

वरना इस उम्र में कितनो को बड़ी कंपनियों Model के तौर पर लेती हैं !

इस Synthetic युग में अपनी औलाद भी , हमारी उम्र वालों को Junk समझ कर Recycle Bin में डाल देती हैं…………..


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“GHAREEBON KI KHIDMAT KA JINHE SHAUQ HOTA HAI”

GHAREEBON KI KHIDMAT KA JINHE SHAUQ HOTA HAI……..अवसर उनके घर चलकर आते हैं !

आज शाम Bodhitrust Foundation के संस्थापक श्री सुनील कुमार और अन्य पदाधिकारी गण मेरे नॉएडा स्थित निवास पर आए I 6 घंटे चली लम्बी मुलाक़ात में ग़रीबों की अनेक सम्स्याओं और उनके समाधान पर विचार-विमर्श हुआ, जिस से कई सकारात्मक हल भी निकले I

Bodhitrust Foundation में पैंतीस हज़ार से भी ज्यादा लोग जुटे हुए हैं और कई राज्यों में इसकी शाखाएं कार्यरत हैं I

कल का दिन श्री सुनील कुमार के लिए बहुत ही शुभ था क्यूंकि महीनों के प्रयास के बाद इनके राजनीतिक दल BPL भारतीय पार्टी (लोकतांत्रिक) को चुनाव आयोग ने मंज़ूरी दे दी I यह पार्टी ग़रीबों के हक के लिए काम करेगी I

श्री सुनील कुमार ने मुझे इसके राष्ट्रीय संरक्षक बनाने का प्रस्ताव भी दिया , जिस से मुझे ग़रीबों की सेवा करने का अवसर मिलेगा I

अल्लाह से दुआ करता हूँ कि इनके इस नेक काम के मिशन को दिन दुनी रात चौगनी तरक्क़ी मिले I आमीन !

 

 

 

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“CLOSE ENCOUNTER WITH SHAHRUKH KHAN”

PLEASE READ AN INTERESTING STORY….. HOW MY WITTY REPLY EARNED ME THE TITLE OF “MAGIC STAR” !!!!

(On the insistence of my FB friends, I am re-posting my old post, detailing my first encounter with mega star “Shahrukh Khan”)

The story dates back to my struggle days. The year was 2001.I knocked all possible doors to reach my goal, of becoming a media celebrity. It was during the time, when mobile major “Airtel”, announced a contest for selection of models for their pre –paid card scheme, named “MAGIC”, first of its kind in India.

Over 35000 people sent their entry. “Airtel”, organized massive in-camera audition for all of them. The recordings were watched minutely by the panel members, who short listed 100 tentative names. The selection panel was headed by Shahrukh Khan & Karishma Kapoor, who watched the recordings of the shortlisted candidates repeatedly and finalized 14 names for final selection round.

A gala function was organized at Hotel Radisson, New Delhi. In camera audition recordings of all the 14 shortlisted candidates were shown to the audience on giant screens, erected all over. Shahrukh Khan took the command of the show, supported by Karishma Kapoor. Shahrukh’s electrifying presence on the stage, was enough to enthrall the audience. Shahrukh, is known for his presence of mind & wittiness. He interacted with the audience & played pranks with contestants.

I became his favorite target for the pranks, because I dared to enact Shahrukh’s famous TV Commercial for clinic shampoo, where his punch line “Sab Dho Dala”, was extremely popular with the viewers in those days. Mine was a very comical skit ,showing a bald person promoting shampoo !!
Shahrukh asked me, how do I handle my hairs. I said, “I have two big issues with my hairs. Firstly, every morning, I have an unusual problem, as I am unable to decide where to stop, while washing my face, as my face covers the entire skull area also. Secondly, I have to pay twice as much to the barber.Rs.100/- for locating the hairs and another Rs.100/-for cutting the same”.

After a couple of hours of fun, all the contestants were called up on the stage for the final round, where each contestant was given pen & paper to write the answer. Shahrukh announced the question “What was the most magical moment of your life”? The contestants were given just 30 seconds to write the answer.

Most of them wrote answers like ,” Meeting Shahrukh Khan, was the most magical moment” etc., probable to get some sympathy. I was the only one, who wrote something beyond pleasing the panel.
My reply was :

“THE MOST MAGICAL MOMENT IN MY LIFE WAS MY MARRIAGE, WHICH INCIDENTALLY TURNED OUT TO BE THE MOST TRAGICAL MOMENT ALSO, BECAUSE, I LOST LICENCE TO FLIRT, THEN & THERE”.

My reply, got thunderous applause and after a while, the result was announced and I got the title of “Magic Star’.

An honor, beyond my imagination!! 
May be because of my witty reply !!!

airtel


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